पिछले लेख में हमने यह जाना कि पर्तिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव किसके द्वारा और कैसे भेजा जा सकता है। आज का बिषय है- प्रस्ताव क्यों भेजे जातें हैं?
राष्ट्रीय सभा :-
सर्वप्रथम हम देखें कि राष्ट्रीय सभा भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि ऐसे कौन से प्रस्ताव है, जिसे राष्ट्रीय सभा स्वयं पारित नहीं कर सकती है और जिन्हें सिर्फ़ प्रतिनिधि सभा ही पारित कर सकती है? यदि, आप पाठक गण इस बिषय पर रोशनी डालें तो मैं आभारी रहूँगा। ध्यान दें कि प्रतिनिधि सभा में मतदान करने का अधिकार सिर्फ़ शाखाओं के मुख्य प्रतिनिधियों को ही है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति:-
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। यहाँ भी मैं थोड़ा (?) confused हूँ कि जब रा० का० स० अपने प्रस्ताव (यदि ऐसे कोई प्रस्ताव हो जिस पर बिना रा० सभा या प्रतिनिधि सभा में पारित करवाए बिना कार्य करना सम्भव न हो तो) अपने प्रस्ताव रा० सभा में रख सकती है और रा० सभा से पारित करवा सकती है, तो फिर प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव रखने कि क्या आवश्यकता पड़ सकती है? किसी साथी नें बताया कि रा० सभा द्वारा rejected प्रस्ताव रा० का० स०, प्रतिनिधि सभा में रख सकती है। अगर इस बात को सही माने तो एक सवाल फिर खड़ा होता है, वो यह है कि क्या प्रतिनिधि सभा रा० सभा द्वारा अस्वीकृत प्रस्तावों पर चर्चा कर सकती है? दोनों सभाओं में मतदाताओं की तुलना करें, तो यह सवाल अप्रासंगिक नहीं रह जाता है।
शाखा
अब आते हैं शाखाओं द्वारा दिए जाने वाले प्रस्तावों पर। अधिवेशन आते ही शाखाओं पर नेतृत्व एवं वरिस्ष्ठ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने हेतु दबाब बनने कि प्रक्रिया भी शरु हो जाती है। समझ में यह नहीं आता कि प्रस्तावों को इतना महत्व राष्ट्रीय सभा के वक्त क्यों नहीं दिया जाता?
जारी
राज कुमार शर्मा
गुरुवार, 27 नवंबर 2008
प्रस्ताव क्यों?
पिछले लेख में हमने यह जाना कि पर्तिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव किसके द्वारा और कैसे भेजा जा सकता है। आज का बिषय है- प्रस्ताव क्यों भेजे जातें हैं?
राष्ट्रीय सभा :-
सर्वप्रथम हम देखें कि राष्ट्रीय सभा भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि ऐसे कौन से प्रस्ताव है, जिसे राष्ट्रीय सभा स्वयं पारित नहीं कर सकती है और जिन्हें सिर्फ़ प्रतिनिधि सभा ही पारित कर सकती है? यदि, आप पाठक गण इस बिषय पर रोशनी डालें तो मैं आभारी रहूँगा। ध्यान दें कि प्रतिनिधि सभा में मतदान करने का अधिकार सिर्फ़ शाखाओं के मुख्य प्रतिनिधियों को ही है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति:-
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। यहाँ भी मैं थोड़ा (?) confused हूँ कि जब रा० का० स० अपने प्रस्ताव (यदि ऐसे कोई प्रस्ताव हो जिस पर बिना रा० सभा या प्रतिनिधि सभा में पारित करवाए बिना कार्य करना सम्भव न हो तो) अपने प्रस्ताव रा० सभा में रख सकती है और रा० सभा से पारित करवा सकती है, तो फिर प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव रखने कि क्या आवश्यकता पड़ सकती है? किसी साथी नें बताया कि रा० सभा द्वारा rejected प्रस्ताव रा० का० स०, प्रतिनिधि सभा में रख सकती है। अगर इस बात को सही माने तो एक सवाल फिर खड़ा होता है, वो यह है कि क्या प्रतिनिधि सभा रा० सभा द्वारा अस्वीकृत प्रस्तावों पर चर्चा कर सकती है? दोनों सभाओं में मतदाताओं की तुलना करें, तो यह सवाल अप्रासंगिक नहीं रह जाता है।
शाखा
अब आते हैं शाखाओं द्वारा दिए जाने वाले प्रस्तावों पर। अधिवेशन आते ही शाखाओं पर नेतृत्व एवं वरिस्ष्ठ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने हेतु दबाब बनने कि प्रक्रिया भी शरु हो जाती है। समझ में यह नहीं आता कि प्रस्तावों को इतना महत्व राष्ट्रीय सभा के वक्त क्यों नहीं दिया जाता?
जारी
राज कुमार शर्मा
राष्ट्रीय सभा :-
सर्वप्रथम हम देखें कि राष्ट्रीय सभा भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि ऐसे कौन से प्रस्ताव है, जिसे राष्ट्रीय सभा स्वयं पारित नहीं कर सकती है और जिन्हें सिर्फ़ प्रतिनिधि सभा ही पारित कर सकती है? यदि, आप पाठक गण इस बिषय पर रोशनी डालें तो मैं आभारी रहूँगा। ध्यान दें कि प्रतिनिधि सभा में मतदान करने का अधिकार सिर्फ़ शाखाओं के मुख्य प्रतिनिधियों को ही है।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति:-
राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति भी प्रतिनिधि सभा हेतु प्रस्ताव भेज सकती है। यहाँ भी मैं थोड़ा (?) confused हूँ कि जब रा० का० स० अपने प्रस्ताव (यदि ऐसे कोई प्रस्ताव हो जिस पर बिना रा० सभा या प्रतिनिधि सभा में पारित करवाए बिना कार्य करना सम्भव न हो तो) अपने प्रस्ताव रा० सभा में रख सकती है और रा० सभा से पारित करवा सकती है, तो फिर प्रतिनिधि सभा में प्रस्ताव रखने कि क्या आवश्यकता पड़ सकती है? किसी साथी नें बताया कि रा० सभा द्वारा rejected प्रस्ताव रा० का० स०, प्रतिनिधि सभा में रख सकती है। अगर इस बात को सही माने तो एक सवाल फिर खड़ा होता है, वो यह है कि क्या प्रतिनिधि सभा रा० सभा द्वारा अस्वीकृत प्रस्तावों पर चर्चा कर सकती है? दोनों सभाओं में मतदाताओं की तुलना करें, तो यह सवाल अप्रासंगिक नहीं रह जाता है।
शाखा
अब आते हैं शाखाओं द्वारा दिए जाने वाले प्रस्तावों पर। अधिवेशन आते ही शाखाओं पर नेतृत्व एवं वरिस्ष्ठ सदस्यों द्वारा प्रस्ताव भेजे जाने हेतु दबाब बनने कि प्रक्रिया भी शरु हो जाती है। समझ में यह नहीं आता कि प्रस्तावों को इतना महत्व राष्ट्रीय सभा के वक्त क्यों नहीं दिया जाता?
जारी
राज कुमार शर्मा
बुधवार, 26 नवंबर 2008
मंच एक आन्दोलन...
दोस्तों मारवाडी युवा मंच की शुरुआत एक आन्दोलन के तौर पर हुई थी और आज जबकि इसके 25 वर्ष पुरे होने को हैं तब लगता है की हमारे वरिष्ठों ने कितना संघर्ष किया होगा इस आन्दोलन को जारी रखने के लिए तब कहीं जाकर हमें ये स्वरुप प्राप्त हुआ है, अब इस आन्दोलन को जारी रखने की जवाबदेही हमारे ऊपर है इसके लिए हमें व्यक्तित्व विकाश की धारा को विशेष रूप से चालू रखना होगा, हमारे साथ आदरणीय शम्भू चौधरी जैसे विचारक उपलब्ध हैं हमें उनके लेखों का पूर्ण लाभ प्राप्त करना चाहिए । वैसे ये हमारा सौभाग्य है की व्यक्तित्व विकाश इस वक़्त के हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनिल के.जाजोदिया जी की भी विशेष रूचि का क्षेत्र है और समय - समय पर हमें उनका स्नेहयुक्त मार्गदर्शन भी प्राप्त होता रहा है।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है|
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है|
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है|
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में|
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो|
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम|
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
- हरिवंशराय बच्चन
सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर
मोबाइल - 9431238161
लेबल:
विचार मंच,
व्यक्तित्व विकास,
सुमित चमडिया
मंच एक आन्दोलन...
दोस्तों मारवाडी युवा मंच की शुरुआत एक आन्दोलन के तौर पर हुई थी और आज जबकि इसके 25 वर्ष पुरे होने को हैं तब लगता है की हमारे वरिष्ठों ने कितना संघर्ष किया होगा इस आन्दोलन को जारी रखने के लिए तब कहीं जाकर हमें ये स्वरुप प्राप्त हुआ है, अब इस आन्दोलन को जारी रखने की जवाबदेही हमारे ऊपर है इसके लिए हमें व्यक्तित्व विकाश की धारा को विशेष रूप से चालू रखना होगा, हमारे साथ आदरणीय शम्भू चौधरी जैसे विचारक उपलब्ध हैं हमें उनके लेखों का पूर्ण लाभ प्राप्त करना चाहिए । वैसे ये हमारा सौभाग्य है की व्यक्तित्व विकाश इस वक़्त के हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अनिल के.जाजोदिया जी की भी विशेष रूचि का क्षेत्र है और समय - समय पर हमें उनका स्नेहयुक्त मार्गदर्शन भी प्राप्त होता रहा है।
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है|
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है|
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है|
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में|
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो|
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम|
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती|
- हरिवंशराय बच्चन
सुमित चमडिया
मुजफ्फरपुर
मुजफ्फरपुर
मोबाइल - 9431238161
लेबल:
विचार मंच,
व्यक्तित्व विकास,
सुमित चमडिया
व्यक्तित्व विकास: सूर्य जब देदीप्यमान होता है
सूर्य जब देदीप्यमान होता है उसी वक्त ही हमें प्रकाश उपलब्ध रहता है और जैसे ही वह लुप्त होने लगता है सर्वत्र पुनः अंधेरा ही छोड़ जाता है। मंच में भी कुछ सूर्य इसी प्रकार अपने साथ प्रकाश लाते हैं उस वक्त हमारी आँखें उस उजाले में चौंधिया जाती है और हमें कुछ भी नहीं सूझता है। कुछ सूर्य रूपी व्यक्तित्व ने मंच को कुछ इसी प्रकार बना दिया है। सूर्य की रोशनी के बाद हमारे पास सर्वत्र अंधेरा ही अंधेरा बचा रहता है। हमें इस अंधेरे को उजाले में बदलना होगा। हर घर में दीप जलाने होंगे हर युवाओं को सूर्य जैसा रोशन करना होगा। एक दीप से कई दीप जलाने की प्रक्रिया को जारी रखना होगा। जब समाज के हर युवाओं में दीप जलने लगेगा तो सूर्य का यह गुमान स्वतः ही समाप्त हो जायेगा। क्या आप दीप जलाने की इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगें। हमें रोज इस बात का इंतजार करने से बेहतर है कि खुद के दीप को प्रज्वलित कर लेना चाहिये साथ ही अपने दीप से दूसरे दीये को भी हम प्रज्वलित कर सकें।
व्यक्तित्व विकास: सूर्य जब देदीप्यमान होता है
सूर्य जब देदीप्यमान होता है उसी वक्त ही हमें प्रकाश उपलब्ध रहता है और जैसे ही वह लुप्त होने लगता है सर्वत्र पुनः अंधेरा ही छोड़ जाता है। मंच में भी कुछ सूर्य इसी प्रकार अपने साथ प्रकाश लाते हैं उस वक्त हमारी आँखें उस उजाले में चौंधिया जाती है और हमें कुछ भी नहीं सूझता है। कुछ सूर्य रूपी व्यक्तित्व ने मंच को कुछ इसी प्रकार बना दिया है। सूर्य की रोशनी के बाद हमारे पास सर्वत्र अंधेरा ही अंधेरा बचा रहता है। हमें इस अंधेरे को उजाले में बदलना होगा। हर घर में दीप जलाने होंगे हर युवाओं को सूर्य जैसा रोशन करना होगा। एक दीप से कई दीप जलाने की प्रक्रिया को जारी रखना होगा। जब समाज के हर युवाओं में दीप जलने लगेगा तो सूर्य का यह गुमान स्वतः ही समाप्त हो जायेगा। क्या आप दीप जलाने की इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगें। हमें रोज इस बात का इंतजार करने से बेहतर है कि खुद के दीप को प्रज्वलित कर लेना चाहिये साथ ही अपने दीप से दूसरे दीये को भी हम प्रज्वलित कर सकें।
प्रस्ताव
अधिवेशन आ रहा है। कुछ लोग अधिवेशन को पर्व मानते हैं तो कुछ लोग इसे सामूहिक चिंतन का अवसर। अपने अपने सोचने का ढंग है। आज का विषय है- अधिवेशनों में चर्चाओं में लाये जाने वाले प्रस्ताव और उनकी प्रासंगिकता।
मंच संविधान के अनुसार अधिवेशन में प्रस्ताव निम्न द्वारा दिए जा सकते हैं;
०१। राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिती
०२। राष्ट्रीय सभा
०३। प्रांतीय सभा
०४। शाखा
०५। सदस्य
राष्ट्रीय का० स० एवं राष्ट्रीय सभा अपने प्रस्ताव सीधे प्रतिनिधि सभा में रख सकती है। जबकि अन्य प्रस्ताव हेतु यह वाध्यता है कि प्रस्ताव अधिवेशन से कम से कम ७ दिनों पूर्व स्वागत समिति तक पहुँच जाए। इन प्रस्तावों को बिषय निर्वाचनी समिति के समक्ष रखा जाएगा, एवं इस समिति की बैठक में कम से कम एक तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित प्रस्ताव ही प्रतिनिधि सभा में रखे जायेंगे। ७ दिनों की इस बाध्यता के क्षेत्र में रा० अ० को बिसेष अधिकार दिए गए हैं।
प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय का० स० एवं राष्ट्रीय सभा एवं बिषय निर्वाचनी समिति द्वारा प्रेषित प्रस्तावों पर चर्चा होगी। चर्चा में हालांकी हर एक प्रतिनिधि को भाग लेने का अधिकार है, पर मतदान करने का अधिकार सिर्फ़ शाखाओं के मुख्य प्रतिनिधियों को ही है।
पर क्या इसका यह अर्थ निकला जाए कि प्रतिनिधि सभा सीधे सदन में आए प्रस्तावों पर चर्चा नहीं कर सकती ?
जारी ...
राज कुमार शर्मा
मंच संविधान के अनुसार अधिवेशन में प्रस्ताव निम्न द्वारा दिए जा सकते हैं;
०१। राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिती
०२। राष्ट्रीय सभा
०३। प्रांतीय सभा
०४। शाखा
०५। सदस्य
राष्ट्रीय का० स० एवं राष्ट्रीय सभा अपने प्रस्ताव सीधे प्रतिनिधि सभा में रख सकती है। जबकि अन्य प्रस्ताव हेतु यह वाध्यता है कि प्रस्ताव अधिवेशन से कम से कम ७ दिनों पूर्व स्वागत समिति तक पहुँच जाए। इन प्रस्तावों को बिषय निर्वाचनी समिति के समक्ष रखा जाएगा, एवं इस समिति की बैठक में कम से कम एक तिहाई बहुमत द्वारा समर्थित प्रस्ताव ही प्रतिनिधि सभा में रखे जायेंगे। ७ दिनों की इस बाध्यता के क्षेत्र में रा० अ० को बिसेष अधिकार दिए गए हैं।
प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रीय का० स० एवं राष्ट्रीय सभा एवं बिषय निर्वाचनी समिति द्वारा प्रेषित प्रस्तावों पर चर्चा होगी। चर्चा में हालांकी हर एक प्रतिनिधि को भाग लेने का अधिकार है, पर मतदान करने का अधिकार सिर्फ़ शाखाओं के मुख्य प्रतिनिधियों को ही है।
पर क्या इसका यह अर्थ निकला जाए कि प्रतिनिधि सभा सीधे सदन में आए प्रस्तावों पर चर्चा नहीं कर सकती ?
जारी ...
राज कुमार शर्मा
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